⚠️ सूचना: यह एक सूचनात्मक लेख है, जो सरकारी स्रोतों पर आधारित है। यह सरकारी वेबसाइट नहीं है। सभी नवीनतम और आधिकारिक जानकारी के लिए कृपया mpeuparjan.nic.in पर जाएँ।
Introduction
अगर आप मध्य प्रदेश के किसान हैं और 2026 में अपनी गेहूँ, चना, मसूर या सरसों की फसल को एमएसपी पर बेचना चाहते हैं, तो ई-उपार्जन पंजीयन अनिवार्य है।
बिना इस पंजीयन के सरकारी खरीद केंद्र पर एक दाना भी नहीं बिकेगा। रबी सीजन 2024-25 की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में करीब 14 लाख किसानों ने पंजीयन कराया था — और 2025-26 सीजन में यह संख्या और अधिक होने का अनुमान है।
इस लेख में हम बताएँगे: कौन-कौन से दस्तावेज़ चाहिए, समग्र आईडी क्यों जरूरी है, और स्लॉट बुकिंग कैसे करनी है। साथ ही उन गलतियों के बारे में भी बताएँगे जिनकी वजह से अधिकतर किसानों का पंजीयन रुक जाता है — जैसे गिरदावरी अपडेट न होना, या आधार व समग्र के नाम में अंतर।
यह जानकारी दिसंबर 2025 के सरकारी नोटिफिकेशन और ई-उपार्जन पोर्टल के आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर आधारित है। पढ़ने के बाद आप पंजीयन खुद करें या सीएससी सेंटर जाएँ — दोनों तरीके यहाँ विस्तार से लिखे हैं।
What is MP E Uparjan Scheme?

बहुत से किसान समझते हैं कि ई-उपार्जन सिर्फ एक ऑनलाइन फॉर्म है। पर यह पूरी प्रक्रिया है — रजिस्ट्रेशन से लेकर भुगतान तक।
एमपी ई-उपार्जन मध्य प्रदेश सरकार का केंद्रीय पोर्टल है। किसान यहाँ समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी फसल बेचने के लिए पंजीयन कराते हैं।
गेहूँ की खरीद 1 अप्रैल 2026 से 5 मई 2026 तक चलेगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, मध्य प्रदेश के आदेश संख्या F/2025/34 दिनांक 15 दिसंबर 2025 के अनुसार यह अवधि तय की गई है।
अब MSP की बात करें। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के 12 दिसंबर 2025 के नोटिफिकेशन संख्या K-43012/1/2025 के अनुसार, गेहूँ का MSP ₹2585 प्रति क्विंटल है। मध्य प्रदेश सरकार ने 5 जनवरी 2026 के अपने आदेश में ₹15 प्रति क्विंटल का बोनस जोड़ दिया। यानी किसान को ₹2600 मिलेंगे।
सोचिए — रामपुर के सुरेश ने 20 क्विंटल गेहूँ उगाया। बिना ई-उपार्जन पंजीयन के वह खरीद केंद्र पर फसल नहीं ले जा सकता। पंजीयन करने के बाद ही स्लॉट मिलेगा। फिर ₹2600 x 20 = ₹52,000 सीधे उसके बैंक खाते में आएँगे। कोई चक्कर नहीं।
अब पहला सवाल — क्या आप इस योजना के लिए पात्र हैं?
Who Can Register?
कई किसान सोचते हैं कि सिर्फ जमीन मालिक ही पंजीयन करा सकते हैं। यह गलत है। बटाईदार या सिकमी किसान भी पात्र हो सकते हैं — बशर्ते शर्तें पूरी हों।
पात्रता के ये चार नियम हैं:
- किसान की समग्र आईडी मध्य प्रदेश में होनी चाहिए।
- जमीन किसान के नाम पर हो, या फिर बटाईदार के पास 2 फरवरी 2026 से पहले का पंजीकृत अनुबंध हो।
- बैंक खाता आधार से लिंक हो। उसी खाते में डीबीटी सक्रिय होना भी जरूरी है।
- जिस फसल को बेचना है, उसका गिरदावरी (क्रॉप सर्वे) राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हो।
प्रेमचंद बटाईदार हैं। उन्होंने भूमि मालिक से 2 हेक्टेयर ली है। 15 जनवरी 2026 को रजिस्ट्रार कार्यालय में उनका लीज एग्रीमेंट पंजीकृत हुआ। इसी अनुबंध के आधार पर वे ई-उपार्जन में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। बिना पंजीकृत कागज के उनका आवेदन रिजेक्ट हो जाएगा — किसानों के साथ अक्सर ऐसा होता है।
आवेदन करते समय एक बात जो लोग अक्सर भूल जाते हैं वो यह है कि गिरदावरी का अपडेट सबसे पहले चेक करना चाहिए। कई किसान सीधे पंजीयन में लग जाते हैं, फिर बाद में रिजेक्शन देखकर परेशान होते हैं। पहले पटवारी से मिल लो, फिर पोर्टल खोलो।
पात्रता तय हो गई? अब दस्तावेज़ तैयार करो। नीचे पूरी लिस्ट है — इसे बिना चूके जरा पढ़ो।
Required Documents Checklist
| दस्तावेज़ का नाम | कहाँ से लाएँ / प्रारूप | क्यों जरूरी है |
|---|---|---|
| समग्र आईडी (SSSM ID) | samagra.mp.gov.in या SMS से | पोर्टल आपकी पहचान और परिवार की जानकारी इसी से चेक करता है |
| आधार कार्ड | आधार सेंटर | बैंक खाता लिंक और ओटीपी वेरिफिकेशन के लिए |
| खसरा / खतौनी नंबर | mpbhulekh.gov.in या पटवारी से | यह आपके खेत के भू-राजस्व रिकॉर्ड की विशिष्ट पहचान है |
| बैंक पासबुक | आपकी बैंक शाखा | डीबीटी सक्रियता चेक करने और भुगतान लेने के लिए |
| मोबाइल नंबर | – | ओटीपी और स्लॉट बुकिंग के लिए, यह समग्र में दर्ज नंबर से मेल खाना चाहिए |
| बटाईदार अनुबंध (यदि लागू हो) | रजिस्ट्रार कार्यालय, तिथि 2 फरवरी 2026 से पहले | जमीन आपके नाम नहीं होने पर यह एकमात्र वैध प्रमाण है |
एक किसान जिसका खसरा नंबर 125/3 और खतौनी नंबर 456 है, उसे ये नंबर ऑनलाइन भुलेख पोर्टल से प्रिंट करने होंगे। एक गलत अंक डाला तो पोर्टल देगा — “भूमि रिकॉर्ड मेल नहीं खाता”। बस फिर शुरू से करो।
दस्तावेज़ तैयार हैं। अब समझते हैं असली प्रक्रिया — दो तरीकों से: अपने मोबाइल से या फिर सीएससी सेंटर पर जाकर।
Step-by-Step Registration Process

[📌 यहाँ mpeuparjan.nic.in के पंजीयन पृष्ठ का स्क्रीनशॉट लगाएँ]
alt=”एमपी ई-उपार्जन पोर्टल पर किसान पंजीयन का होम पेज 2026″
Online Registration (by yourself)
Step 1: mpeuparjan.nic.in खोलो। “Farmer Registration” पर क्लिक करो।
Step 2: समग्र आईडी और आधार नंबर डालो। ओटीपी रजिस्टर्ड मोबाइल पर आएगा।
Step 3: खसरा और खतौनी नंबर डालो। पोर्टल खुद गिरदावरी डेटा लाएगा।
Step 4: फसल चुनो — गेहूँ, चना, मसूर, या राई (सरसों)।
Step 5: “Farmer ID” बन जाने के बाद, स्लॉट बुकिंग करो। स्लॉट सिर्फ 7 कार्य दिवस के लिए वैध होता है। पूरा पंजीयन लगभग 10 मिनट में खत्म हो जाता है — पोर्टल पर क्लिक करने से लेकर फार्मर आईडी मिलने तक।
Offline Registration (via CSC / MP Online Kiosk)
Step 1: नजदीकी सीएससी सेंटर खोजो (csc.gov.in पर पते हैं)। प्रदेश में 3186 निःशुल्क पंजीयन केंद्र हैं — ये आंकड़ा 2025 के सरकारी बजट से लिया गया है।
Step 2: सभी दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी ले जाओ। केंद्र संचालक फॉर्म भरने में मदद करेगा।
Step 3: वह ओटीपी तुम्हारे मोबाइल पर लेगा और वेरिफिकेशन करेगा। केंद्र पर कोई शुल्क नहीं है। सरकार केंद्र संचालक को ₹10 प्रति किसान देती है — यह राशि तुमसे नहीं ली जा सकती।
Step 4: सफल पंजीयन का प्रिंट ले लो। उस पर फार्मर आईडी छपी होगी।
⚠️ सावधानी: यदि आपके पंजीयन में ‘Crop not matched’ एरर आता है, तो बिना गिरदावरी दुरुस्त कराए दोबारा कोशिश मत करो। बार-बार असफल प्रयास से आपकी समग्र आईडी 24 घंटे के लिए लॉक हो सकती है — ऐसा कई किसानों ने अनुभव किया है। फिर उसी खाते से अगले दिन ही पंजीयन हो पाता है।
पंजीयन हो गया। अब सबसे बड़ा डर — भुगतान कब मिलेगा? और नहीं मिला तो क्या करें?
How to Check Payment Status and Lodge Grievance
फसल बेचने के पाँच दिन बाद भी पैसा न आए तो किसान बेचैन हो जाता है। अक्सर सही नंबर पर कॉल नहीं कर पाता।
भुगतान की स्थिति पोर्टल पर “Payment Status” लिंक से देखो। सरकार का नियम है — फसल तौलने के 5-7 कार्य दिवस में भुगतान आधार लिंक्ड बैंक खाते में आ जाएगा। यह नियम 2023 में बना था, तब से यही चल रहा है।
यदि 7 दिन में भुगतान नहीं मिलता है, तो ये कदम उठाओ:
- पहले बैंक शाखा में जाँच करो — डीबीटी सक्रिय है कि नहीं?
- ई-उपार्जन पोर्टल पर “Raise Complaint” विकल्प में शिकायत दर्ज करो।
- जिला आपूर्ति नियंत्रक (District Supply Controller) के कार्यालय फोन करो — हर जिले का नंबर पोर्टल पर है।
- सीएम हेल्पलाइन पोर्टल
cmhelpline.mp.gov.inपर ऑनलाइन शिकायत करो। वहाँ सात दिन में जवाब मिलना चाहिए। - टोल फ्री नंबर 0755-2552160 (MP Online कस्टमर केयर) पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे के बीच कॉल करो। ध्यान रखो — 181 महिला हेल्पलाइन है, यह ई-उपार्जन के लिए नहीं है।
सीहोर जिले के कमल ने 10 अप्रैल को गेहूँ बेचा। 20 अप्रैल तक पैसा नहीं आया। उन्होंने पोर्टल पर शिकायत दर्ज की और जिला आपूर्ति कार्यालय को फोन लगाया। पता चला — खाते में आधार अद्यतन नहीं था। अद्यतन कराने के बाद 25 अप्रैल को पैसा आ गया। पाँच दिन का इंतज़ार और था।
आम तौर पर देखा गया है कि गाँव के किसान अक्सर सीएससी सेंटर पर जाने से कतराते हैं। उन्हें लगता है पैसे कट जाएँगे, लेकिन सरकारी सेंटर पर एक रुपया नहीं लगता। 3186 में से अधिकतर सेंटर में कोई शुल्क नहीं है।
इतनी सारी जानकारी के बाद भी कुछ किसान वही गलतियाँ दोहराते हैं। अगले भाग में तीन सबसे सामान्य गलतियाँ बताई गई हैं — इनसे बचिए।
3 Common Mistakes That Reject Registration
Mistake 1 – गिरदावरी अपडेट नहीं होना
सबसे बड़ी गलती: किसान बिना गिरदावरी चेक किए पंजीयन में लग जाते हैं। पोर्टल सीधे राजस्व विभाग के डेटा से फसल जाँचता है। अगर पटवारी ने गेहूँ नहीं दर्ज किया, तो पंजीयन रिजेक्ट। समाधान: पहले पटवारी से मिलो। पटवारी को आपके खेत का दौरा करने में 2-3 दिन लग सकते हैं। कोई शुल्क नहीं है। गिरदावरी ऑनलाइन दर्ज करवाओ।
Mistake 2 – समग्र आईडी और आधार का नाम मेल न खाना
पोर्टल ओटीपी वेरिफिकेशन के समय समग्र का नाम और आधार का नाम मिलाता है। समग्र में “राम सिंह” है और आधार पर “Ram Singh” — एरर आएगा। उदाहरण देखो: “रामस्वरूप” बनाम “राम स्वरूप” भी नहीं चलेगा। समाधान: जन सेवा केंद्र से समग्र सुधारो, या आधार केंद्र से आधार सुधारो। इसमें 5-7 दिन लगते हैं।
Mistake 3 – पुराने मोबाइल नंबर का उपयोग
बहुत से किसान समग्र में मोबाइल नंबर अपडेट नहीं कराते। पंजीयन के समय ओटीपी पुराने नंबर पर जाता है। समाधान: नजदीकी जन सेवा केंद्र या ई-मित्र से समग्र में मोबाइल नंबर अपडेट कराओ। साथ ही बैंक में भी वही मोबाइल लिंक होना चाहिए।
⚠️ एक और सावधानी: कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को अपना ओटीपी मत बताना। हर साल 2-3 मामले सामने आते हैं जहाँ नकली कॉल करके किसानों के पैसे निकाल लिए जाते हैं। सरकारी पंजीयन में ओटीपी सिर्फ पोर्टल पर माँगा जाता है, फोन पर कभी नहीं।
एक और बात जो अक्सर देखी गई है: किसान मोबाइल नंबर अपडेट कराने को टालते रहते हैं, और फिर पंजीयन के दिन ओटीपी नहीं आने पर पछताते हैं। फिर वही कहानी — सीएससी सेंटर के चक्कर, फिर से लाइन, और समय बर्बाद। पहले से नंबर चेक करके रखो।
अब हम सबसे अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब देते हैं। ये सवाल असली किसानों ने पूछे हैं — इन्हें ध्यान से पढ़िए।
FAQ (12 Questions)
Q1: ई-उपार्जन के लिए अंतिम तिथि क्या है?
गेहूँ के लिए पंजीयन 7 फरवरी से 10 मार्च 2026 तक है। चना, मसूर, तुअर के लिए 20 फरवरी से 16 मार्च 2026 तक। स्लॉट बुकिंग 7 अप्रैल 2026 से खुलेगी। सरकार कभी-कभी तिथियाँ बढ़ा देती है — 2025 में गेहूँ की तिथि 12 मार्च तक बढ़ी थी। इसलिए पोर्टल mpeuparjan.nic.in पर नोटिफिकेशन देखते रहो।
Q2: क्या बिना समग्र आईडी के पंजीयन हो सकता है?
नहीं। समग्र आईडी अब पूरी तरह अनिवार्य है। 2026 में “One Farmer One ID” सिस्टम लागू हो चुका है। यदि समग्र नहीं है तो नजदीकी जन सेवा केंद्र जाओ — वहाँ परिवार के सदस्यों की जानकारी दर्ज करके समग्र आईडी बना दी जाएगी। उसके बाद ही पंजीयन करो।
Q3: बटाईदार किसान कैसे पंजीयन करेगा?
बटाईदार के पास रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत लीज एग्रीमेंट होना चाहिए, जिसकी तिथि 2 फरवरी 2026 से पहले की हो। साथ ही भूमि मालिक से एनओसी भी लेनी होगी। ये दोनों दस्तावेज़ पंजीयन के समय अपलोड करने होते हैं। बिना पंजीकृत अनुबंध के आवेदन रिजेक्ट।
Q4: मान लीजिए ‘आधार-समग्र मिसमैच’ एरर आ रहा है, क्या करूँ?
मतलब समग्र का नाम और आधार का नाम बिल्कुल मेल नहीं खाता। उदाहरण के लिए, समग्र में “रामचंद्र वर्मा” और आधार में “Ramchandra Verma” — यह भी एरर देगा। दोनों में से किसी एक को सुधरवाओ — जन सेवा केंद्र या आधार केंद्र जाओ। सुधार में 5-7 दिन लग सकते हैं।
Q5: क्या मैं बिना खसरा-खतौनी के पंजीयन कर सकता हूँ?
बिल्कुल नहीं। खसरा (प्लॉट नंबर) और खतौनी (भूमि रिकॉर्ड नंबर) पोर्टल पर माँगे जाते हैं। अगर कागज़ नहीं है तो mpbhulekh.gov.in पर जाओ — जिला, तहसील, गाँव डालकर ऑनलाइन खतौनी डाउनलोड करो। वेबसाइट न समझ आए तो पटवारी से प्रिंट निकलवा लो। पंजीयन के समय वही नंबर डालो जो प्रिंट पर है।
Q6: गिरदावरी अपडेट नहीं है, तो पंजीयन होगा?
नहीं। यह सबसे बड़ा कारण है रिजेक्शन का। गिरदावरी यानी पटवारी का फसल सर्वे — वह आपके खेत का दौरा करके ऑनलाइन दर्ज करता है कि कौन सी फसल कहाँ उगी। यदि दर्ज नहीं है तो पोर्टल को लगेगा कि आपने वह फसल उगाई ही नहीं। तुरंत पटवारी से संपर्क करो और गिरदावरी अद्यतन करवाओ।
Q7: क्या ई-उपार्जन पंजीयन के लिए पैसे देने पड़ते हैं?
खुद ऑनलाइन करने पर एक रुपया भी नहीं। सरकारी सीएससी सेंटर और सहकारी समितियों पर भी निःशुल्क। अगर कोई निजी साइबर कैफे ₹50 से ज़्यादा माँगता है, तो शिकायत करो — एमपी ऑनलाइन हेल्पलाइन 0755-2552160 पर। याद रखो: सरकार केंद्र संचालक को प्रति किसान ₹10 देती है — यह राशि तुमसे नहीं ली जा सकती।
Q8: स्लॉट बुक कर लिया, लेकिन फसल अभी पूरी नहीं पकी — स्लॉट बदल सकता हूँ?
नहीं बदल सकते। एक बार स्लॉट बुक होने के बाद उसे रद्द या बदला नहीं जा सकता। स्लॉट की वैधता 7 कार्य दिवस है। यदि 7 दिन में फसल नहीं ले जाओगे तो स्लॉट खत्म हो जाएगा, और फिर से नई बुकिंग करनी पड़ेगी — बशर्ते अंतिम तिथि न निकल गई हो। इसलिए सलाह: जब फसल पूरी तरह कटने और सुखने तैयार हो तभी स्लॉट बुक करो।
Q9: क्या केवल गेहूँ के अलावा दूसरी फसलें भी बेची जा सकती हैं?
हाँ। पोर्टल पर रबी में गेहूँ, चना, मसूर, तुअर, सरसों (राई) और खरीफ में धान, मूँग, उड़द, सोयाबीन के लिए पंजीयन होता है। हर फसल का एमएसपी अलग है — उदाहरण के लिए चना का MSP ₹5650 प्रति क्विंटल (2026 के लिए)। हर फसल के पंजीयन और स्लॉट बुकिंग के अलग समय होते हैं। पोर्टल पर “Crop Calendar” देख लो।
Q10: पंजीयन के बाद फार्मर आईडी कैसे मिलेगी?
पंजीयन सफल होते ही पोर्टल एक 14 अंकों की फार्मर आईडी (किसान पहचान संख्या) देगा। यह नंबर सफलता पेज पर दिखेगा और रजिस्टर्ड मोबाइल पर एसएमएस भी आएगा। इस आईडी को सुरक्षित रखो — स्लॉट बुकिंग और भुगतान की स्थिति देखने के लिए इसी की जरूरत पड़ेगी। यदि आईडी खो जाए तो पोर्टल पर “Forgot Farmer ID” से समग्र आईडी डालकर पुनः प्राप्त करो।
Q11: क्या दूसरे राज्य के किसान एमपी ई-उपार्जन का उपयोग कर सकते हैं?
नहीं। यह योजना केवल मध्य प्रदेश के स्थायी निवासियों के लिए है जिनकी समग्र आईडी एमपी में बनी है। यदि आप उत्तर प्रदेश, राजस्थान या किसी अन्य राज्य के किसान हैं, तो अपने राज्य की MSP खरीद योजना देखो। एमपी सरकार केवल एमपी भूमि पर उगाई फसलों की खरीद करती है।
Q12: पंजीयन के बाद पता चले कि ग़लत फसल चुन ली — बदल सकता हूँ?
नहीं बदल सकते। पंजीयन सबमिट होने के बाद फसल बदलने का विकल्प नहीं है। यदि गेहूँ की जगह चना डाल दिया तो पुराना पंजीयन रद्द नहीं हो सकता। एकमात्र समाधान: उसी समग्र आईडी से नया पंजीयन करो — पोर्टल “New Registration” का विकल्प देगा। पुरानी गलत प्रविष्टि की अनदेखी करो और सही फसल के साथ दोबारा पंजीयन करो।
Conclusion
ई-उपार्जन पंजीयन अब सरकारी गोदामों पर फसल बेचने की पहली सीढ़ी है। सबसे ज़रूरी बात — पहले गिरदावरी चेक करवाओ, फिर समग्र और आधार का नाम मिलाओ, उसके बाद ही पंजीयन शुरू करो। यह तीन कदम हैं, इनमें से एक भी छूटा तो काम रुकेगा।
हर साल हजारों किसान यह गलती करते हैं जो सीधे पंजीयन में कूद पड़ते हैं और फिर असफल होकर निराश हो जाते हैं। यदि ऑनलाइन समझ न आए तो बिना झिझक नजदीकी सीएससी सेंटर जाओ — वहाँ निःशुल्क सहायता मिलती है। अंतिम तिथि गेहूँ के लिए 10 मार्च 2026 है, देर मत करो। अधिकारिक पोर्टल: mpeuparjan.nic.in.
किसी भी समस्या पर एमपी ऑनलाइन हेल्पलाइन 0755-2552160 (सुबह 10 से शाम 6 बजे तक) पर कॉल करो। अपनी फसल के दस्तावेज़ — खसरा-खतौनी का प्रिंट, फार्मर आईडी का एसएमएस, और स्लॉट बुकिंग का स्क्रीनशॉट — हमेशा साथ रखो। धन्यवाद।
📌 आधिकारिक स्रोत एवं अस्वीकरण
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है।
यह सरकारी वेबसाइट नहीं है।
स्रोत:
mpeuparjan.nic.in– आधिकारिक ई-उपार्जन पोर्टल- कृषि मंत्रालय अधिसूचना संख्या K-43012/1/2025 (12 दिसंबर 2025)
- खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, मध्य प्रदेश आदेश संख्या F/2025/34 (15 दिसंबर 2025)
mpbhulekh.gov.in– भू-राजस्व पोर्टलcsc.gov.in– सामान्य सेवा केंद्र
अंतिम अद्यतन: जनवरी 2026
लेखक के बारे में
यह लेख mp-e-uparjan.com की संपादकीय टीम द्वारा तैयार किया गया है, जो मध्य प्रदेश सरकारी योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में किसानों तक पहुँचाने का काम करती है। सभी सूचनाएँ सरकारी स्रोतों पर आधारित हैं। किसी भी नवीनतम संशोधन के लिए कृपया आधिकारिक पोर्टल देखें।
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